103 साल की उम्र में बुजुर्ग का हुआ निधन, पोतों ने ढोल-नगाड़ों के साथ दी अंतिम विदाई
मोगा: इलाके में उस समय भावुक माहौल बन गया, जब 103 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद एक बुजुर्ग का निधन हो गया। परिवार ने अपने बुजुर्ग की अंतिम विदाई को यादगार बनाते हुए ढोल-नगाड़ों के साथ अंतिम यात्रा निकाली। इस दौरान परिवार के सदस्यों की आंखों में आंसू थे, वहीं दादा के प्रति उनके सम्मान और प्यार ने हर किसी को भावुक कर दिया।
बुजुर्ग के पोते प्रेम सिंह ने भावुक होते हुए बताया कि जब वह और उनके भाई-बहन बहुत छोटी उम्र के थे, तब उनके माता-पिता इस दुनिया से चल बसे थे। उस कठिन समय में उनके दादा ने मां और पिता दोनों की जिम्मेदारी निभाते हुए उनका पालन-पोषण किया। उन्होंने उन्हें पढ़ाया-लिखाया, हर कदम पर उनका साथ दिया और कभी भी माता-पिता की कमी महसूस नहीं होने दी।प्रेम सिंह ने कहा कि दादा जी ने पूरी जिंदगी उनके लिए प्यार, सहारे और मार्गदर्शन का स्रोत बने रहे। आज उनके सिर से वह साया उठ गया है, जिसने उन्हें जीवनभर संभाला। उनका निधन परिवार के लिए कभी न पूरा होने वाला घाटा है। दादा की यादें, उनका प्यार और उनके दिए संस्कार हमेशा परिवार के दिलों में जिंदा रहेंगे।
परिवार के सदस्य तरसेम सिंह ने बताया कि बुजुर्ग ने अपना पूरा जीवन बेहद सादगी, ईमानदारी और मेहनत से बिताया। वह बचपन से उन्हें जानते थे। उन्होंने मेहनत-मजदूरी के साथ सिलाई का काम भी किया और उस समय महज दस पैसे में सिलाई करके परिवार का गुजारा चलाया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनका स्वभाव बेहद शांत, नम्र और मिलनसार रहा। उन्होंने कभी किसी से ऊंची आवाज में बात नहीं की और न ही किसी का दिल दुखाया।
तरसेम सिंह ने कहा कि 103 वर्ष की आयु तक जीवन बिताना अपने आप में एक लंबा सफर है। हर इंसान को एक दिन इस दुनिया से विदा होना है, लेकिन बड़ी बात यह है कि उन्होंने अपना जीवन ईमानदारी, मेहनत और अच्छे संस्कारों के साथ बिताया और पीछे एक मजबूत पारिवारिक विरासत छोड़ गए, जिन बच्चों को दादा ने मां-बाप की कमी महसूस नहीं होने दी और खुद मां-पिता दोनों की भूमिका निभाकर उनका पालन-पोषण किया, आज उन्हीं पोतों ने पूरे सम्मान और भावुक मन से उन्हें अंतिम विदाई दी। ढोल-नगाड़ों के साथ निकली अंतिम यात्रा इलाके में चर्चा का विषय बनी रही और इस दौरान लोगों ने बुजुर्ग के प्रति परिवार के सम्मान की सराहना की।