लोग दवा और इलाज के अभाव में जान गंवा रहे और सुक्खू सरकार केंद्र का पैसा भी नहीं खर्च कर पा रही : जयराम ठाकुर

📍 स्थान / Location: शिमला 🗂️ विषय / Category: हिमाचल / Himachal 📹 Free Medicine Scheme 📅 August 29, 2026 🌐 GPS: शिमला

लोग दवा और इलाज के अभाव में जान गंवा रहे और सुक्खू सरकार केंद्र का पैसा भी नहीं खर्च कर पा रही : जयराम ठाकुर*

शिमला। शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में लोग दवाइयों और बेहतर इलाज के अभाव में अपनी जान गंवा रहे हैं। हैरानी इस बात की है कि सुक्खू सरकार केंद्र सरकार द्वारा नि:शुल्क दवा नीति के तहतभेजा गया पैसा भी नहीं खर्च कर पा रही है।

सुक्खू सरकार ने अपने कार्यकाल में मोदी सरकार द्वारा भेजे गए सैकड़ों करोड़ रुपए सिर्फ स्वास्थ्य विभाग के वापस कर चुकी है। जबकि इसी दवाई के लिए कभी किसी बेटी के सिर से पिता का साया उठ रहा है तो कभी एक बेटा मां के जेवर गिरवी रख रहा है, तो कभी एक मां को अपना मंगलसूत्र बेचना पड़ रहा है। पैसा होने के बाद भी सुक्खू सरकार उसे खर्च करने के बजाय प्रदेश के लोगों की जान से खिलवाड़ क्यों कर रही है? मुख्यमंत्री को अपनी मंशा भी साफ करनी चाहिए।

जयराम ठाकुर ने कहा कि अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। ऐसे समय में केंद्र सरकार हिमाचल को स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भरपूर सहयोग दे रही है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार लगातार केंद्र पर हिमाचल को सहयोग न देने का आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के लिए केंद्र से प्राप्त सैकड़ों करोड़ रुपये की राशि भी खर्च न कर पाने के कारण सरकार को वापस करनी पड़ी है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधानसभा में सामने आए आंकड़े सुक्खू सरकार के दावों की पोल खोलते हैं। अतारांकित प्रश्न संख्या 1777 के जवाब में सरकार ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा निःशुल्क दवा योजना के तहत पिछले तीन वर्षों में 211.29 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई। जिसमें से सुक्खू सरकार द्वारा केवल 165.60 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए, जबकि 45.69 करोड़ रुपये यानी लगभग एक चौथाई राशि खर्च नहीं हो पाई। जबकि प्रदेश के दूर-दराज के अस्पतालों को छोड़ दीजिए, मेडिकल कॉलेजों में भी खांसी, सर्दी और जुकाम की दवाइयां, मरहम-पट्टी, नीडल और सिरिंज का भी टोटा है। महंगी दवाइयां तो छोड़िए, लोगों को ग्लूकोज की बोतल भी ढंग से नहीं उपलब्ध हो पा रही हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में केंद्र द्वारा हिमाचल को 80.10 करोड़ रुपये उपलब्ध हुए, जिनमें से 66.22 करोड़ रुपये खर्च किए गए और 13.88 करोड़ रुपये शेष रहे। वर्ष 2025-26 में 95.30 करोड़ रुपये में से 74.31 करोड़ रुपये खर्च हुए और 20.99 करोड़ रुपये शेष रहे। वहीं वर्ष 2026-27 में 1 अगस्त 2026 तक 35.89 करोड़ रुपये उपलब्ध हुए, जिनमें से केवल 25.07 करोड़ रुपये खर्च किए गए और 10.82 रुपये करोड़ शेष हैं। जयराम ठाकुर ने कहा सुक्खू सरकार की नाकामी का इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है कि केंद्र से मिलने वाली राशि का उपयोग करने के बजाय सरकार उसे खर्च न कर पाने के कारण वापस कर रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवा में बजट का उपयोग न कर पाना केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि इसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। गरीब परिवार सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं और दवाइयां उपलब्ध न होने पर उन्हें मजबूरन अपनी जेब से महंगा इलाज और दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल की मदद में कोई कमी नहीं छोड़ रही है, लेकिन सुक्खू सरकार अपनी प्रशासनिक अक्षमता का ठीकरा केंद्र के सिर फोड़ने में लगी है। जनता को आरोप-प्रत्यारोप नहीं, अस्पतालों में दवा और इलाज चाहिए। सरकार को इसका जवाब देना होगा कि जब पैसा उपलब्ध था, तो दवाइयां क्यों नहीं पहुंचीं और करोड़ों रुपये खर्च क्यों नहीं किए गए।

Scroll to Top