फीस वृद्धि पर SFI प्रतिनिधिमंडल की कुलपति से वार्ता, SFI ने कहा- HPU में एक प्रतिशत भी फीस वृद्धि स्वीकार नहीं

📍 स्थान / Location: शिमला 🗂️ विषय / Category: हिमाचल / Himachal 📹 himachal 📅 August 22, 2026 🌐 GPS: शिमला

शिमला: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में हाल ही में की गई फीस वृद्धि के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के क्रम में आज SFI के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के कुलपति से मुलाकात कर छात्रों की मांगों को स्पष्ट रूप से रखा। प्रतिनिधिमंडल ने फीस वृद्धि को पूरी तरह वापस लेने तथा विश्वविद्यालय की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्थिति से जुड़े गंभीर सवालों पर ठोस कार्रवाई की मांग की।

वार्ता के दौरान कुलपति की ओर से बताया गया कि शैक्षणिक फीस में प्रस्तावित वृद्धि को 25-30 प्रतिशत से घटाकर लगभग 10 प्रतिशत किया गया है। इसके अतिरिक्त हॉस्टल फीस को पूरी तरह वापस लेने, उसका पुनर्मूल्यांकन करने तथा री-इवैल्यूएशन और करेक्शन फीस में 50 प्रतिशत तक कमी करने की बात भी रखी गई।

SFI ने स्पष्ट किया कि फीस वृद्धि को कुछ प्रतिशत कम कर देना छात्रों की मूल समस्या का समाधान नहीं है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एक राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालय है और इसे चलाने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। छात्रों को विश्वविद्यालय के वित्तीय संसाधन के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसलिए फीस में 25-30 प्रतिशत की वृद्धि को घटाकर 10 प्रतिशत करना भी किसी रूप में न्यायसंगत नहीं है। फीस वृद्धि को 10 प्रतिशत तक सीमित करने की प्रक्रिया छात्रों को राहत देने के बजाय फीस वृद्धि को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की विश्वविद्यालय प्रशासन की रणनीति प्रतीत होती है। SFI का स्पष्ट मत है कि फीस में एक प्रतिशत की वृद्धि भी स्वीकार्य नहीं है और पूरी फीस वृद्धि वापस ली जानी चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की मौजूदा वित्तीय स्थिति के मूल कारणों की ओर भी कुलपति का ध्यान आकर्षित किया। SFI ने कहा कि विश्वविद्यालय के आर्थिक संकट का बोझ छात्रों पर डालने के बजाय विश्वविद्यालय में हुई शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। CAG रिपोर्ट में विश्वविद्यालय में हुई नियुक्तियों से संबंधित गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख सामने आया है, जिनमें 186 शिक्षकों की नियुक्तियों से जुड़े मामले भी शामिल हैं। SFI ने इन मामलों की जांच के लिए न्यायिक समिति गठित करने की मांग दोहराई।

SFI ने कुलपति के समक्ष स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय की वित्तीय समस्याओं का समाधान छात्रों की फीस बढ़ाकर नहीं, बल्कि वित्तीय पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और नियुक्तियों में हुई कथित अनियमितताओं की जांच के माध्यम से किया जाना चाहिए, जिन निर्णयों और प्रक्रियाओं के कारण विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति प्रभावित हुई है, उनकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

SFI ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि फीस वृद्धि को पूरी तरह वापस लिया जाए, हॉस्टल फीस में की गई वृद्धि को समाप्त रखा जाए, री-इवैल्यूएशन एवं करेक्शन फीस में प्रस्तावित कमी को लागू किया जाए तथा CAG रिपोर्ट में सामने आए शिक्षक नियुक्तियों से संबंधित मामलों की न्यायिक जांच के लिए समिति गठित की जाए।

SFI ने दोहराया कि “शिक्षा अधिकार है, विशेषाधिकार नहीं” और राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालयों के आर्थिक संकट का समाधान छात्रों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालकर नहीं किया जा सकता। SFI विश्वविद्यालय के छात्रों के हित में फीस वृद्धि की पूर्ण वापसी तक अपना आंदोलन जारी रखेगी।

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