फरीदकोट में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन, 11 हजार से अधिक मामलों का होगा निपटारा
फरीदकोट में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन, 11 हजार से अधिक मामलों का होगा निपटारा
फरीदकोट: नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी, नई दिल्ली और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश एवं पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, एस.ए.एस. नगर (मोहाली) के कार्यकारी अध्यक्ष के दिशा-निर्देशों के तहत फरीदकोट जिले में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह चेयरमैन, जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण फरीदकोट श्री संजय अग्निहोत्री के नेतृत्व में जिले की विभिन्न अदालतों में लोक अदालत की कार्यवाही संपन्न हुई।
7 अलग-अलग स्थानों पर बनाए गए लोक अदालत के बेंच
राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए फरीदकोट की अदालतों में 6 बेंच, स्थायी लोक अदालत में 1 बेंच और सब-डिवीजन जैतो में 1 बेंच गठित किया गया। इन बेंचों के माध्यम से बड़ी संख्या में लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों का आपसी सहमति से समाधान किया गया।
11,252 मामलों का हुआ निपटारा
लोक अदालत में कुल 12,955 मामलों को सुनवाई के लिए रखा गया, जिनमें से 11,252 मामलों का निपटारा किया गया। इन मामलों में कुल 18,29,83,511 रुपये के अवॉर्ड पारित किए गए।
वहीं, प्री-लिटिगेशन स्तर पर भी बड़ी संख्या में मामलों का समाधान हुआ। कुल 11,971 प्री-लिटिगेशन मामलों में से 10,690 मामलों का निपटारा किया गया और 1,45,71,908 रुपये के अवॉर्ड पास किए गए।
कई तरह के मामलों का आपसी सहमति से समाधान
लोक अदालत में दीवानी विवाद, समझौता योग्य आपराधिक मामले, चेक बाउंस, रिकवरी, ट्रैफिक चालान और घरेलू विवादों सहित विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई की गई। पक्षकारों की आपसी सहमति और समझौते के आधार पर मामलों का निपटारा किया गया।
लोक अदालत के फैसले को डिक्री की मान्यता
इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय अग्निहोत्री ने लोगों को लोक अदालत के फायदों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में आपसी समझौते से होने वाले फैसले के खिलाफ सामान्य तौर पर अपील का प्रावधान नहीं होता और ऐसे निर्णय को डिक्री की मान्यता प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत के जरिए विवादों का संतोषजनक और शीघ्र समाधान होने से लोगों को लंबे समय तक चलने वाली मुकदमेबाजी और उससे जुड़ी मानसिक परेशानियों से राहत मिलती है।