कबड्डी जगत को बड़ा झटका: नामवर जाफी रूपिंदर गोरा समालसर का 40 वर्ष की उम्र में निधन
कबड्डी जगत को उस समय गहरा सदमा लगा, जब अपने समय के नामवर कबड्डी खिलाड़ी और शानदार जाफी रूपिंदर सिंह ‘गोरा समालसर’ का 40
मोगा: कबड्डी जगत को उस समय गहरा सदमा लगा, जब अपने समय के नामवर कबड्डी खिलाड़ी और शानदार जाफी रूपिंदर सिंह ‘गोरा समालसर’ का 40 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही गांव समालसर सहित कबड्डी खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों और विभिन्न कबड्डी क्लबों से जुड़ी हस्तियों ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। परिवार के अनुसार रूपिंदर गोरा पिछले करीब डेढ़ वर्ष से काला पीलिया और किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। पिछले 11 दिनों से लुधियाना के डी.एम.सी. अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
रूपिंदर गोरा ने अपने कबड्डी करियर के दौरान मुक्तसर, फरीदकोट कबड्डी क्लब, फिरोजपुर कबड्डी क्लब, बाजाखाना और शिकारपुरी क्लब सहित कई नामवर टीमों की ओर से खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया। पंजाब के अलावा उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित कबड्डी प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया और अपनी मजबूत जाफी के दम पर अलग पहचान बनाई। कई टूर्नामेंटों और खेल मेलों में उन्हें ‘बेस्ट जाफी’ के खिताब से भी नवाजा गया।
मैदान में उनकी फुर्ती, मजबूत पकड़ और खेल के प्रति समर्पण ने उन्हें कबड्डी प्रेमियों के बीच खास पहचान दिलाई। वर्ष 2015 में कुछ घरेलू मजबूरियों के कारण वह कुछ समय के लिए कबड्डी के मैदान से दूर हो गए थे। इसके बाद वर्ष 2018 में उन्होंने दोबारा कबड्डी के मैदान में वापसी की। उन्होंने अपने गांव समालसर के अलावा लंडे और रोडे की टीमों की ओर से भी खेलते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
परिवार के सदस्यों के अनुसार रूपिंदर गोरा की दिली इच्छा थी कि वह अपनी तीन वर्षीय बेटी को भी कबड्डी से जोड़ें, लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी होने से पहले ही वह दुनिया को अलविदा कह गए। रूपिंदर गोरा अपने पीछे दादा, माता-पिता, एक भाई, पत्नी और तीन वर्षीय बेटी को छोड़ गए हैं। उनके निधन से कबड्डी जगत ने एक मेहनती, प्रतिभाशाली और खेल के प्रति समर्पित खिलाड़ी खो दिया है। कबड्डी के मैदान में उनके योगदान और शानदार खेल को लंबे समय तक याद किया जाता रहेगा।