खराब सड़क से प्रभावित हो रहा तीर्थन घाटी का पर्यटन कारोबार, सरकार से की जल्द सुधार की मांग

📍 स्थान / Location: तीर्थन, KULLU 🗂️ विषय / Category: हिमाचल / Himachal 📅 August 26, 2026 🌐 GPS: Kullu

हिमाचल: प्रदेश के कुल्लू जिला का उपमंडल बंजार की तीर्थन घाटी जो ग्रेट हिमालय नेशनल पार्क और अपनी विश्व धरोहर के लिए देश दुनिया में जानी जाती है। तो वहीं बीते 10 सालों से यहां पर पर्यटन कारोबार भी काफी बढ़ा है। लेकिन बंजार से बठाहड़ सड़क के बदहाल हालात के चलते अब यहां का पर्यटन कारोबार भी खतरे में पड़ रहा है। इतना ही नहीं एक बार जो सैलानी यहां पर घूमने के लिए आता है। वह खराब सड़क को देखकर इतना परेशान हो जाता है कि वह दोबारा यहां आने का नाम नहीं लेता। ऐसे में बदहाल सड़क के कारण स्थानीय लोगों की भी परेशानी बढ़ रही है और वर्तमान में भूल और मिट्टी ही इस सड़क पर नजर आ रही है।

तीर्थन घाटी के स्थानीय निवासी शेर सिंह का कहना है कि यहां पर सरकार आए दिन ग्रामीण क्षेत्र के लिए सड़कों का शिलान्यास कर रही है। लेकिन जो इस पूरी घाटी को जोड़ने वाले मुख्य सड़क है। उसकी कोई सुध नहीं ले रहा है। सरकार को चाहिए कि वह पहले पुरानी सड़क की हालत को सुधारे। ग्रामीण शेर सिंह का कहना है कि तीर्थन घाटी में मुख्य सड़क के साथ-साथ अन्य सड़कों के भी हाल काफी खराब है। यहां पर अगर मरीज को अस्पताल ले जाना है। तो पहले उन्हें चारपाई पर लाना पड़ता है। इसके अलावा राशन के लिए भी कई इलाकों में ग्रामीणों को 5 किलोमीटर से लेकर 10 किलोमीटर का पैदल सफर करना पड़ता है। ऐसे में सरकार पहले सड़क की ओर विशेष ध्यान दें।

तीर्थन घाटी के पर्यटन व्यवसायी महेंद्र सिंह का कहना है कि साल 2025 की आपदा के बाद से लेकर अभी तक सड़क की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है। इस सड़क में कई स्थान ऐसे हैं जो आए दिन भूस्खलन की चपेट में आते हैं और पूरी सड़क गड्ढों से भरी हुई है। यहां पर लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि बागवानी और पर्यटन ही है। लेकिन जब सड़क की हालत ही ठीक नहीं है। तो किस तरह से ग्रामीण अपने लिए रोजगार के संसाधन जुटा पाएंगे। यहां पर जो सैलानी एक बार कदम रखता है तो वह खराब सड़क को देखकर दूसरी बार यहां ना आने का मन बना लेता है। जिससे घाटी का पर्यटन कारोबार भी प्रभावित हो रहा है।

घाटी के पर्यटन व्यवसाय अंकित सूद का कहना है कि यहां पर सैलानियों के लिए मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है। ना तो यहां पर एटीएम की व्यवस्था है और ना ही इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चार्जिंग की व्यवस्था है। उसके बावजूद भी यहां स्थानीय लोग अपनी मेहनत से यहां का पर्यटन कारोबार चल रहे हैं। लेकिन जो समय सैलानी को चंडीगढ़ से ओट पहुंचने में लगता है। उससे अधिक समय उसे मात्र 40 किलोमीटर का सफर तय करने में लग जाता है और उनका पूरा जोश भी हवा हो जाता है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह सड़क जैसे मूलभूत सुविधा पर काम करें। ताकि तीर्थन घाटी के लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

स्थानीय नीलचंद ने बताया कि सड़को की हालत बेहद खस्ता है. ऐसे में तीर्थन घाटी और आसपास की पंचायतों में ग्रामीणों को सफ़र करना परेशानी भरा रहता है. उन्होंने बताया कि स्कूली बच्चों को भी कई बार पैदल चल कर आधा सफर तय करना पड़ रहा है. ऐसे में सरकार से उनकी मांग है कि जल्द से जल्द इस क्षेत्र में सड़को को बेहतर बनाया जाए.

दिनेश्वर ने बताया कि ग्रामीणों इलाकों में अभी भी सड़को की हालत खराब होने से बीमारी के समय अस्पताल पहुंचना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में कई क्षेत्रों में टोह मरीज़ को पीठ पर उठा कर नीचे लाया जा रहा है. और बठाहड़ तक पहुँचने के लिए भी टैक्सी का सहारा लेना पड़ रहा है. ऐसे में लोगो पर आर्थिक बोझ भी पर रहा है।

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