जहांगीर गांव में इथेनॉल फैक्ट्री को लेकर ग्रामीणों का विरोध, प्रदूषण बोर्ड ने लिए पानी-मिट्टी और हवा के सैंपल
संगरूर: जहांगीर गांव में स्थित इथेनॉल फैक्ट्री को लेकर आसपास के गांवों के लोगों में विरोध देखने को मिला। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री से निकलने वाला गंदा या केमिकलयुक्त पानी जमीन के नीचे डाला जा रहा है, जिससे इलाके के भूजल पर बुरा असर पड़ने की आशंका है।
शिकायत के बाद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी गांव के सरपंचों के साथ फैक्ट्री पहुंचे। टीम ने फैक्ट्री के अलग-अलग हिस्सों का निरीक्षण किया और हवा, पानी तथा मिट्टी के सैंपल लिए। अधिकारियों के मुताबिक, सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।
वहीं, मौके पर पहुंचे सरपंचों ने बताया कि फैक्ट्री में पानी के स्तर की निगरानी के लिए बोरवेल और बोरहोल मौजूद हैं। उनके मुताबिक, फैक्ट्री में गंदे पानी को ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए मौके पर ही ट्रीट कर दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान गंदे पानी को जमीन के नीचे डालने का कोई सबूत सामने नहीं आया।
फैक्ट्री प्रबंधन भी इन आरोपों से पहले ही इनकार कर चुका है। प्रबंधन का कहना है कि मक्का और चावल से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले पानी को ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए साफ किया जाता है और उसका दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। प्रबंधन के अनुसार, इस पानी को न तो जमीन के नीचे डाला जाता है और न ही बाहर छोड़ा जाता है।
अब पूरे मामले की तस्वीर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लिए गए सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी। अधिकारियों के मुताबिक, रिपोर्ट करीब एक महीने में आने की उम्मीद है।