निजी भवन में किराया देकर चल रहा गुशैनी स्कूल, बीते साल आपदा में ढह गया था स्कूल भवन
कूल्लू: हिमाचल प्रदेश में बीते साल आई प्राकृतिक आपदा के चलते जहां सैकड़ो भवन क्षतिग्रस्त हुए तो वहीं सरकारी संपत्ति को भी इस से खासा नुकसान पहुंचा, जिला कुल्लू के उपमंडल बंजार की तीर्थन घाटी के सीनियर सेकेंडरी स्कूल गुशैनी की अगर बात करें तो इसका भवन भी बीते साल सितंबर माह में आई आपदा के कारण पूरी तरह से नष्ट हुआ था। ऐसे में अब स्कूल निजी भवन में चल रहा है। हैरत की बात तो यह है कि यहां पर बच्चे अपनी जेब से पैसा देकर निजी भवन में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल प्रबंधन समिति के माध्यम से प्रतिमाह 22000 रुपए किराया दिया जा रहा है। हालांकि नए स्कूल भवन निर्माण के लिए करीब 5 बीघा भूमि का चयन किया गया है, लेकिन अभी तक उसे एफआरए की क्लीयरेंस नहीं मिल पाई है। ऐसे में निजी भवन में शिक्षा ग्रहण करने के लिए अभिभावकों की जेब भी ढीली हो रही है।
सीनियर सेकेंडरी स्कूल गुशैनी के अगर बात करें तो यहां पर पांच पंचायत के दर्जनों गांव के छात्र शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं। वर्तमान में स्कूल में 390 से अधिक छात्र और छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। पहले यह स्कूल गुशेनी बाजार के समीप चलता था, लेकिन नया भवन करीब 2 किलोमीटर दूरी पर है। ऐसे में तीर्थन घाटी में बरसात के चलते कई सड़के भी बंद पड़ी हुई है। कई छात्रों को करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। ऐसे में स्कूल पहुंचने के लिए उन्हें कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ता है और निजी भवन में शिक्षा ग्रहण करने के लिए भी उन्हें पैसा देना पड़ रहा है। वही स्कूल प्रबंधन समिति और अभिभावकों ने भी शिक्षा विभाग और सरकार से मांग रखी है कि जिस जगह पर नए भवन का निर्माण होना है। उस भूमि की एफआरए क्लीयरेंस की प्रक्रिया भी तेज की जाए। ताकि बच्चे अपने स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर सके।
अभिभावक शेर सिंह का कहना है कि सितंबर माह से यह स्कूल निजी भवन में चल रहा है और बीते साल सितंबर माह से लेकर मार्च महीने तक भवन मालिक के द्वारा इस बच्चों के भविष्य को देखते हुए कोई किराया नहीं लिया गया। अब इस भवन का किराया अभिभावकों को मिलकर देना पड़ रहा है बच्चे कई किलोमीटर दूर से पैदल चलकर आते हैं और कई जगह पर बच्चों को बसों के भी सुविधा नहीं मिल रही है। ऐसे में कई बार बच्चे टैक्सियों के माध्यम से भी स्कूल पहुंच रहे हैं। सरकार और प्रशासन से आग्रह है कि वह स्कूल प्रबंधन समिति के द्वारा दिए जा रहे किराए को लेकर भी बजट का प्रावधान करें।
अभिभावक प्रताप सिंह का कहना है कि पहले जो स्कूल गुशेनी में चलता था। वह बाजार में था और अब यह भवन करीब 2 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। ऐसे में बसों की सुविधा न होने के चलते बच्चों को 2 किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता है। कई बार शाम को बच्चे पैदल ही अपने घरों की ओर रवाना होते हैं। निजी भवन का किराया भी एसएमसी के माध्यम से दिया जा रहा है। ऐसे में अब सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द स्कूल का अपना भवन बनाने की दिशा में कार्य करें।
सीनियर सेकेंडरी स्कूल गुशेनी स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष महेंद्र सिंह ने बताया कि बीते साल सितंबर माह से लेकर मार्च महीने तक भवन का कोई किराया नहीं लिया गया। क्योंकि बरसात के चलते यहां सड़के भी बंद थी और बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए किसी प्रकार की भी व्यवस्था नहीं थी। अब स्कूल प्रबंधन समिति के माध्यम से प्रतिमा 22000 रुपए किराया किया जा रहा है महेंद्र सिंह का कहना है कि स्कूल प्रबंधन समिति और शिक्षा विभाग के द्वारा मिलकर नई भूमि का चयन किया गया और एफआरए के लिए उसकी फाइल भी वन विभाग को भेजी गई है। शिक्षा विभाग और सरकार से आग्रह है कि वे भवन के किराए के लिए भी बजट का प्रावधान करें और भूमि के लिए जो अनापति प्रमाण मिलना है। उसे भी जल्द जारी करें।
सीनियर सेकेंडरी स्कूल गुशेनी के प्रधानाचार्य के एल शर्मा का कहना है कि पहले स्कूल चलाने के लिए भवन मालिक के द्वारा कोई किराया नहीं लिया गया। लेकिन अब यहां पर किराया दिया जा रहा है। स्कूल का पुराना भवन क्षतिग्रस्त हो गया है। वर्तमान में स्कूल में 390 से अधिक छात्र और छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। पहले यह स्कूल गुशेनी बाजार के समीप चलता था। लेकिन नया भवन करीब 2 किलोमीटर दूरी पर है। नए भवन निर्माण को लेकर भी विभाग के द्वारा औपचारिकताएं पूरी की जा रही है। शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के समक्ष भी किराए का मामला रखा गया है। वही लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को भी नए भवन में किराए संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बारे में निर्देश जारी किया गए हैं और वह सभी औपचारिकता है शिक्षा विभाग की उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।