फारूक अब्दुल्ला का बड़ा बयान: बोले- आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना होगा, दिल्ली पर निर्भरता छोड़नी होगी

📍 स्थान / Location: Srinagar 🗂️ विषय / Category: जम्मू और कश्मीर / J & K 📹 Article 370 📅 August 26, 2026 🌐 GPS: Srinagar

श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के लोगों से आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में काम करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक गरिमा, आत्मसम्मान और राजनीतिक आकांक्षाओं को केंद्र पर लगातार आर्थिक निर्भरता के साथ नहीं जोड़ा जा सकता।

बिजली की दरों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर पूछे गए सवाल पर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को रियायतों और वित्तीय सहायता के लिए बार-बार नई दिल्ली की ओर देखने के बजाय अपने आर्थिक आधार को मजबूत करना चाहिए। श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आप कब तक गुलाम रहेंगे? किसी न किसी मोड़ पर हमें अपने पैरों पर खड़ा होना ही होगा। आप कब खड़े होंगे? आप कब तक दिल्ली से भीख मांगते रहेंगे?

अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग का जिक्र करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि राजनीतिक आकांक्षाएं और आर्थिक निर्भरता एक साथ नहीं चल सकतीं। उन्होंने कहा कि आप आर्टिकल 370 चाहते हैं, फिर भी भीख मांगते हैं। ये दोनों चीजें एक साथ नहीं चल सकतीं। जम्मू-कश्मीर के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके अब्दुल्ला ने कहा कि क्षेत्र के आत्मसम्मान, प्रतिष्ठा और राजनीतिक उम्मीदों को बनाए रखने के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करना जरूरी है।

महिलाओं के खिलाफ अपराध पर भी जताई चिंता

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर टिप्पणी करते हुए अब्दुल्ला ने इसके लिए समाज में नैतिक और धार्मिक मूल्यों से बढ़ती दूरी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समुदायों के लोग अपनी धार्मिक शिक्षाओं और मूल्यों से तेजी से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चाहे वह मुस्लिम हो, हिंदू हो या सिख हो। हमने खुद को धर्म से दूर कर लिया है और यह उसी का नतीजा है।

अब्दुल्ला ने आगे कहा कि अगर लोग अपने धर्मों की शिक्षाओं और नैतिक मूल्यों के करीब रहते, तो ऐसी घटनाएं कम होतीं। उन्होंने कहा कि हम सिर्फ नाम के मुस्लिम हैं, अपने कामों से नहीं। और बाकी सबके साथ भी यही हाल है। फारूक अब्दुल्ला की यह टिप्पणी जम्मू-कश्मीर में बिजली की दरों, आर्थिक निर्भरता, राजनीतिक अधिकारों और बढ़ती सामाजिक चिंताओं को लेकर जारी बहस के बीच आई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाना, आत्मसम्मान की रक्षा करना और नैतिक एवं धार्मिक मूल्यों को मजबूत करना जरूरी है।

Scroll to Top