बच्चों से जुड़े आत्महत्या प्रयास के मामलों में फोटो और CCTV फुटेज साझा करने पर लगी रोक
बच्चों से जुड़े आत्महत्या प्रयास के मामलों में फोटो और CCTV फुटेज साझा करने पर लगी रोक
शोपियां: जिला बाल संरक्षण अधिकारी (DCPO), शोपियां ने बच्चों से जुड़े आत्महत्या या आत्महत्या के प्रयास के मामलों की रिपोर्टिंग और जानकारी साझा करने को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों, संस्थानों, मीडिया संगठनों और आम लोगों से ऐसे मामलों में बच्चे की तस्वीर, CCTV फुटेज या पहचान उजागर करने वाली किसी भी जानकारी को प्रसारित या प्रकाशित न करने को कहा गया है।
यह आदेश मिशन वात्सल्य के तहत जारी किया गया है। जिला बाल संरक्षण इकाई, शोपियां के संज्ञान में बच्चे से जुड़ा आत्महत्या के प्रयास का एक मामला आने के बाद यह निर्देश जारी किए गए।
बच्चे की पहचान उजागर करने वाली जानकारी पर रोक
DCPO के आदेश के मुताबिक बच्चे की फोटो, CCTV फुटेज, वीडियो, स्क्रीनशॉट या ऐसी कोई भी जानकारी साझा नहीं की जा सकती, जिससे सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से बच्चे की पहचान सामने आती हो।
बच्चे का नाम, पता, स्कूल, माता-पिता की पहचान से जुड़ी जानकारी, संपर्क नंबर, घटना का स्थान और अन्य व्यक्तिगत विवरण सार्वजनिक करने पर भी रोक लगाई गई है। हालांकि, कानून के तहत अनुमति प्राप्त मामलों या सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी वाली परिस्थितियों को इससे अलग रखा गया है।
सोशल मीडिया पर केस रिकॉर्ड साझा करना भी प्रतिबंधित
आदेश में ऐसे मामलों से जुड़े केस रिकॉर्ड, जांच दस्तावेज, मेडिकल जानकारी, बयान और अन्य गोपनीय सामग्री को सोशल मीडिया या सार्वजनिक संचार माध्यमों पर साझा करने से भी मना किया गया है।
WhatsApp, Telegram, Facebook, Instagram और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म पर ऐसी संवेदनशील सामग्री को पोस्ट करने या आगे फॉरवर्ड करने पर भी रोक रहेगी।
जांच के लिए CCTV फुटेज कैसे इस्तेमाल होगी?
DCPO ने आत्महत्या या आत्महत्या के प्रयास से जुड़े मामलों की CCTV फुटेज को गोपनीय सामग्री के तौर पर रखने के निर्देश दिए हैं। यदि जांच या न्यायिक प्रक्रिया के लिए फुटेज की जरूरत हो, तो उसे केवल सक्षम जांच एजेंसी, अदालत या कानूनन अधिकृत प्राधिकारी को ही उपलब्ध कराया जा सकेगा।
इसका उद्देश्य बच्चे की निजता और पहचान की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
Juvenile Justice Act की धारा 74 का हवाला
आदेश में Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 की धारा 74 का उल्लेख किया गया है। यह प्रावधान बच्चों की पहचान और उनसे जुड़ी पहचान योग्य जानकारी की सुरक्षा से संबंधित है, जिसमें कानून के उल्लंघन से जुड़े बच्चे, देखभाल एवं संरक्षण की जरूरत वाले बच्चे तथा जांच या न्यायिक कार्यवाही में शामिल बाल पीड़ित या गवाह शामिल हैं।
आदेश में कहा गया है कि धारा 74(3) के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर छह महीने तक की सजा, 2 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
मीडिया को भी संवेदनशील रिपोर्टिंग के निर्देश
जिला बाल संरक्षण कार्यालय ने पत्रकारों, समाचार एजेंसियों और डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स से बच्चों से जुड़े आत्महत्या प्रयास के मामलों की रिपोर्टिंग में लागू कानून और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के मानकों का पालन करने को कहा है।
विशेष रूप से सनसनीखेज रिपोर्टिंग, बच्चे की फोटो या वीडियो प्रकाशित करने, गैर-जरूरी व्यक्तिगत विवरण देने और घटना को बार-बार या प्रमुखता से प्रसारित करने से बचने की सलाह दी गई है।
कानूनी रिपोर्टिंग पर नहीं है रोक
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कानून के तहत वैध रिपोर्टिंग या जांच पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। हालांकि, किसी भी परिस्थिति में बच्चे की पहचान या पहचान योग्य जानकारी को Juvenile Justice Act के प्रावधानों के विपरीत सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए।
जिला बाल संरक्षण कार्यालय ने सभी संबंधित पक्षों से बच्चे की निजता, गरिमा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की है।