विश्वविद्यालय बचाओ अभियान का 9वां दिन, HPUTWA ने स्वायत्तता की रक्षा के लिए संघर्ष तेज़ किया

📍 स्थान / Location: शिमला 🗂️ विषय / Category: हिमाचल / Himachal 📹 Full Video / पूरा वीडियो 📅 September 10, 2026 🌐 GPS: शिमला

विश्वविद्यालय बचाओ अभियान का 9वां दिन, HPUTWA ने स्वायत्तता की रक्षा के लिए संघर्ष तेज़ किया

विश्वविद्यालय बचाओ अभियान का 9वां दिन, HPUTWA ने स्वायत्तता की रक्षा के लिए संघर्ष तेज़ किया

शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और अकादमिक स्वतंत्रता की रक्षा को लेकर HPUTWA का “विश्वविद्यालय बचाओ अभियान” लगातार नौवें दिन भी जारी रहा। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित विरोध प्रदर्शन में शिक्षकों ने एकजुट होकर विश्वविद्यालय की निर्णय लेने की स्वतंत्रता, अकादमिक गरिमा और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली को बनाए रखने की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान डॉ. शिव दास कटोच, डॉ. जोगिंदर सकलानी, डॉ. अशोक बंसल, डॉ. राजेश, डॉ. संजय शर्मा तथा HPUTWA अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने अपने विचार रखे।

डॉ. शिव दास कटोच ने कहा कि विश्वविद्यालय की पहचान उसकी अकादमिक स्वतंत्रता और स्वायत्त निर्णय प्रक्रिया से होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का अनावश्यक बाहरी हस्तक्षेप संस्थान की मूल भावना को प्रभावित कर सकता है।

डॉ. जोगिंदर सकलानी ने कहा कि विश्वविद्यालय को मजबूत बनाने के लिए नियंत्रण बढ़ाने के बजाय संसाधनों और शैक्षणिक सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की।

डॉ. अशोक बंसल ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता केवल प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि यह शिक्षण, शोध और अकादमिक निर्णयों की स्वतंत्रता से सीधे जुड़ी हुई है। उन्होंने वैधानिक निकायों की भूमिका को प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया।

डॉ. राजेश ने कहा कि विश्वविद्यालय की समस्याओं का समाधान संवाद और संस्थागत प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुधार के नाम पर ऐसी व्यवस्था नहीं बनाई जानी चाहिए जिससे विश्वविद्यालय की स्वतंत्र कार्यप्रणाली प्रभावित हो।

डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने पिछले 56 वर्षों में शिक्षा, शोध और समाज के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि इस विरासत को सुरक्षित रखने के लिए विश्वविद्यालय की स्वायत्तता की रक्षा करना जरूरी है।

HPUTWA अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने कहा कि नौ दिनों से चल रहा यह अभियान शिक्षकों की एकजुटता और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक जवाबदेही और पारदर्शिता के पक्ष में हैं, लेकिन विश्वविद्यालय की स्वायत्तता से समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

धर्मशाला क्षेत्रीय केंद्र में भी प्रदर्शन

विश्वविद्यालय बचाओ अभियान के समर्थन में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला में भी विरोध प्रदर्शन किया गया। शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता और संस्थागत गरिमा की रक्षा की मांग उठाई तथा HPUTWA के अभियान के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने जोरदार नारे लगाते हुए कहा—

“विश्वविद्यालय को जवाबदेह बनाइए, लेकिन अधीनस्थ नहीं; संसाधन बढ़ाइए, नियंत्रण नहीं। सुधार कीजिए, लेकिन स्वायत्तता मत छीनिए।”

HPUTWA ने कहा कि “विश्वविद्यालय बचाओ अभियान” का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता और संस्थागत गरिमा की रक्षा करना है।

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