रूमसू काहिका में सांस्कृतिक विरासत यात्रा: तीन महाविद्यालयों के 60 विद्यार्थियों ने किया क्षेत्र-अध्ययन

📍 स्थान / Location: Kullu 🗂️ विषय / Category: हिमाचल / Himachal 📹 Full Video / पूरा वीडियो 📅 August 20, 2026 🌐 GPS: Kullu

रूमसू काहिका में सांस्कृतिक विरासत यात्रा: तीन महाविद्यालयों के 60 विद्यार्थियों ने किया क्षेत्र-अध्ययन

तीन महाविद्यालयों के मध्य हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतर्गत रूमसू काहिका में सांस्कृतिक विरासत यात्रा का आयोजन किया गया। इस यात्रा में राजकीय महाविद्यालय कुल्लू, जे.एल.एन. राजकीय महाविद्यालय हरिपुर मनाली तथा राजकीय महाविद्यालय पनारसा से कुल 60 विद्यार्थियों एवं 10 अध्यापकों ने भाग लिया।

विद्यार्थियों ने काहिका उत्सव के दौरान स्थानीय सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत का प्रत्यक्ष अध्ययन किया। उन्होंने स्थानीय लोगों, आयोजन से जुड़े व्यक्तियों एवं समुदाय के सदस्यों से संवाद कर काहिका की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, लोकविश्वासों, परंपराओं, अनुष्ठानों तथा सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व से संबंधित जानकारी एकत्रित की। विद्यार्थियों ने विभिन्न पक्षों पर शोधपरक डेटा संकलित करने के साथ-साथ उत्सव में सक्रिय सहभागिता भी की।

इस यात्रा में प्रो. सोम नेगी, डॉ. कविता कटोच, प्रो. सुरेश कुमार, बिंदु (लाइब्रेरियन), डॉ. माही योगेश, प्रो. प्रोमिला राणा, डॉ. लीना वैद्या तथा डॉ. अनुपमा कटोच सहित अन्य अध्यापकों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। राजकीय महाविद्यालय कुल्लू के प्राचार्य राकेश राणा तथा राजकीय महाविद्यालय पनारसा की प्राचार्या डॉ. उरसेम लता भी इस विरासत यात्रा का हिस्सा रहे।

राकेश राणा, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय कुल्लू ने कहा कि स्थानीय उत्सवों और परंपराओं का प्रत्यक्ष अध्ययन विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है तथा उन्हें विरासत संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाता है।

डॉ. उरसेम लता, प्राचार्या, राजकीय महाविद्यालय पनारसा ने कहा कि इस प्रकार की क्षेत्र-आधारित शैक्षणिक यात्राएँ विद्यार्थियों में शोध, संवाद, डेटा संकलन और दस्तावेजीकरण की व्यावहारिक क्षमता विकसित करती हैं। उन्होंने कहा कि जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं का प्रत्यक्ष अनुभव विद्यार्थियों के लिए कक्षा-कक्ष से बाहर सीखने का महत्वपूर्ण अवसर है।

यह सांस्कृतिक विरासत यात्रा विद्यार्थियों को स्थानीय इतिहास, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को समझने, दर्ज करने तथा भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने की दिशा में एक सार्थक पहल रही।

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