डल झील के प्रदूषण पर मंत्री जावेद राणा ने की समीक्षा, संरक्षण के लिए विभागों को मिलकर काम करने के निर्देश

📍 स्थान / Location: Srinagar 🗂️ विषय / Category: जम्मू और कश्मीर / J & K 📹 Full Video / पूरा वीडियो 📅 September 3, 2026 🌐 GPS: Srinagar

श्रीनगर: जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण और जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद अहमद राणा ने डल झील में प्रदूषण की मौजूदा स्थिति और झील के संरक्षण के लिए चल रहे कामों की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित विभागों को मिलकर काम करने और झील की पर्यावरणीय स्थिति सुधारने के लिए तत्काल और लंबे समय के उपाय करने के निर्देश दिए।

बैठक में जम्मू-कश्मीर लेक्स कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (LCMA) के उपाध्यक्ष, PHE/I&FC कश्मीर के मुख्य अभियंता, UEED कश्मीर के मुख्य अभियंता, जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति के क्षेत्रीय निदेशक और हाइड्रोलिक सर्कल श्रीनगर के अधीक्षण अभियंता समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

डल झील की सुरक्षा सभी की जिम्मेदारी

जावेद राणा ने कहा कि डल झील की सुरक्षा और संरक्षण सिर्फ किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सभी संबंधित एजेंसियों और आम लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि डल झील कश्मीर की महत्वपूर्ण पर्यावरणीय, सांस्कृतिक और पर्यटन संपत्तियों में से एक है। यह देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण होने के साथ-साथ जलीय जैव विविधता और मछलियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बढ़ती मानवीय गतिविधियों के कारण झील के प्राकृतिक संतुलन पर कोई नकारात्मक असर न पड़े, इसके लिए लगातार निगरानी और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

30 MLD का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माणाधीन

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि डल झील में पहुंचने से पहले सीवेज के पानी को मौजूदा व्यवस्था के जरिए उपचारित किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, AMRUT योजना के तहत 30 MLD क्षमता का नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) निर्माणाधीन है। इसके अगले दो वर्षों के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। इसके शुरू होने से सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता बढ़ेगी और झील पर प्रदूषण का दबाव कम करने में मदद मिलेगी।

कचरा और जलीय खरपतवार हटाने पर जोर

बैठक में डल झील की सफाई और संरक्षण के लिए किए जा रहे तत्काल उपायों की भी समीक्षा की गई। इनमें, झील क्षेत्र से अतिक्रमण हटाना। रोजाना कचरे को इकट्ठा कर बाहर निकालना। झील में उगने वाली जलीय खरपतवार को हटाना। निकाली गई खरपतवार को जैव-उर्वरक में बदलना। प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई करना। शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि झील की स्थिति खराब करने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए नियमित कार्रवाई की जा रही है।

पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी के निर्देश

जावेद राणा ने अधिकारियों को झील के पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदूषण के संभावित हॉटस्पॉट की पहचान करने पर भी जोर दिया, ताकि ऐसे क्षेत्रों में तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।

उन्होंने कहा कि डल झील को बचाने के लिए केवल सफाई अभियान पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट, ठोस कचरा प्रबंधन, अतिक्रमण हटाने, खरपतवार नियंत्रण, पानी की निगरानी और पर्यावरणीय नियमों को सख्ती से लागू करना जरूरी है।

लोगों की भागीदारी जरूरी

मंत्री ने झील के आसपास रहने वाले लोगों और उससे जुड़े समुदायों को संरक्षण अभियान में शामिल करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि लगातार जन-जागरूकता और स्थानीय लोगों की भागीदारी से संरक्षण के प्रयास ज्यादा प्रभावी और लंबे समय तक टिकाऊ बनाए जा सकते हैं।

जावेद राणा ने संबंधित विभागों को आपसी तालमेल मजबूत करने के निर्देश देते हुए कहा कि डल झील के संरक्षण के लिए तत्काल और दीर्घकालिक दोनों योजनाओं पर एक साथ काम किया जाना चाहिए, ताकि झील की पारिस्थितिक स्थिति में वास्तविक और स्थायी सुधार लाया जा सके।

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