पीएमएवाई की किस्त दुकान के नाम पर लेने का मामला, निगम ने संपत्ति की सील
प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत सरकारी सहायता राशि लेने के मामले में नगर निगम मोगा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ
पीएमएवाई की किस्त दुकान के नाम पर लेने का मामला, निगम ने संपत्ति की सील
रिहायशी मकान बताकर 1.12 लाख रुपये की सहायता राशि लेने का आरोप, 2022 में निगम कमिश्नर को दी गई थी लिखित शिकायत
मोगा, 2 अक्टूबर। प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत सरकारी सहायता राशि लेने के मामले में नगर निगम मोगा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। वार्ड नंबर 17 के लाल सिंह रोड, गली नंबर-2 में जिस संपत्ति को रिहायशी मकान दर्शाकर योजना के तहत 1 लाख 12 हजार 500 रुपये की राशि जारी किए जाने की बात सामने आई है, वहां लंबे समय से व्यावसायिक गतिविधियां चलने का आरोप है। मामला सामने आने के बाद नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच ने निगम कमिश्नर की मंजूरी के बाद 30 सितंबर की देर रात संबंधित दुकान को सील कर दिया। दुकान पर निगम की ओर से नोटिस भी चस्पा किया गया है।
मामले को लेकर वार्ड नंबर 17 की पार्षद कुलदीप कौर के बेटे विक्रम सिंह द्वारा 1 अप्रैल 2022 को नगर निगम कमिश्नर को दी गई लिखित शिकायत भी सामने आई है। शिकायत नंबर 134 में आरोप लगाया गया था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गुरदीप कौर पत्नी जसवंत सिंह के नाम फाइल नंबर 96 के तहत करीब डेढ़ लाख रुपये की सहायता मंजूर की गई है, जबकि संबंधित जगह पर खाली प्लॉट या रिहायशी मकान के बजाय ‘मनकीरत बिस्तर भंडार’ के नाम से दुकान संचालित हो रही है। वर्तमान में यहां ‘मनकीरत किराना स्टोर’ चलने की जानकारी सामने आई है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया था कि जसवंत सिंह के नाम इसी गली में मकान नंबर 911 है। शिकायतकर्ता के अनुसार वर्ष 2016 में इसी मकान के लिए नगर निगम से स्वच्छ भारत मिशन के तहत बाथरूम निर्माण की योजना का लाभ लिया गया था और इसके तहत मकान के फोटोग्राफ भी निगम रिकॉर्ड में जमा करवाए गए थे। ऐसे में एक ही संपत्ति से जुड़ी अलग-अलग सरकारी योजनाओं के तहत लिए गए लाभ को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
मौके की जांच और जियो टैगिंग पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता ने वर्ष 2022 में ही मामले की जांच करवाकर विभागीय कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत में कहा गया था कि यदि पीएमएवाई के तहत राशि जारी करने से पहले मौके की वास्तविक स्थिति की जांच, फोटोग्राफी और जियो टैगिंग की प्रक्रिया सही ढंग से की जाती तो संपत्ति में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों का पता लगाया जा सकता था। इसी आधार पर योजना से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।
पीएमएवाई के तहत लाभार्थी की पात्रता और आवास की स्थिति का सत्यापन महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि वर्ष 2022 में शिकायत मिलने के बाद मौके की जांच किस स्तर पर की गई और संबंधित फाइल व दस्तावेजों का सत्यापन किस प्रकार हुआ।
करीब चार साल बाद हुई सीलिंग कार्रवाई
नगर निगम में पीएमएवाई से संबंधित फाइलों की जांच करने वाले दीपांशु ने बताया कि मामला वर्ष 2019 में किए गए आवेदन से संबंधित है। उस समय वह नगर निगम में तैनात नहीं थे। उनकी तैनाती सितंबर 2022 में हुई, जबकि संबंधित महिला को योजना की राशि वर्ष 2021 में जारी हुई थी। उन्होंने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद करीब दो-तीन महीने पहले संबंधित महिला को नोटिस जारी किया गया था और वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से मामले की जांच भी की गई थी।
वहीं, निगम अधिकारियों के अनुसार मामले में आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर तय की जाएगी। बिल्डिंग ब्रांच की टीम ने निगम कमिश्नर की मंजूरी के बाद 30 सितंबर को संबंधित दुकान को सील किया है। मौके पर नोटिस भी चस्पा किया गया है।
अब जांच का विषय यह है कि पीएमएवाई की राशि जारी करने से पहले संपत्ति की वास्तविक स्थिति की जांच किस स्तर पर हुई और जियो टैगिंग समेत अन्य प्रक्रिया किस आधार पर पूरी की गई। निगम की ओर से संबंधित फाइलों की दोबारा जांच किए जाने की बात कही जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि राशि जारी करने में किसी कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही हुई अथवा मामले में किसी अन्य स्तर पर भी अनियमितता सामने आती है।
फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित लाभार्थी पक्ष का पक्ष भी सामने आना बाकी है।