USBRL के बाद भी J&K में कई रेल परियोजनाएं अधर में, सर्वे और DPR स्टेज पर अटके प्रोजेक्ट
USBRL reaches Kashmir, but large parts of J&K remain outside the railway map
श्रीनगर: उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) के पूरा होने से कश्मीर घाटी की रेल कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आया है। हालांकि, जम्मू-कश्मीर के रेलवे नेटवर्क में अभी भी कई महत्वपूर्ण कमियां बनी हुई हैं। कई प्रस्तावित रेल विस्तार परियोजनाएं अभी सर्वे या डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के चरण में हैं, जबकि कुछ परियोजनाएं फीजिबिलिटी असेसमेंट से आगे नहीं बढ़ पाई हैं।
इनमें सबसे प्रमुख परियोजनाओं में राजौरी और पुंछ जैसे सीमावर्ती जिलों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की योजना शामिल है। अगस्त 2026 में रेल मंत्रालय ने 190 किलोमीटर लंबी जम्मू/रियासी-पुंछ नई रेल लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दी। इसके तहत DPR तैयार करने के लिए फील्ड वर्क शुरू किया गया है। इसका मतलब है कि यह परियोजना फिलहाल निर्माण चरण तक नहीं पहुंची है।
जम्मू-पुंछ रेल कनेक्शन अभी भी इंतजार में
जम्मू से पुंछ को रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर लंबे समय से विचार किया जा रहा है। अखनूर और राजौरी के रास्ते जम्मू-पुंछ रेल लाइन के लिए किए गए पहले के सर्वे में परियोजना की लागत करीब 22,771 करोड़ रुपये आंकी गई थी। साथ ही, यातायात का अनुमान भी अपेक्षाकृत कम दर्ज किया गया था। इसके चलते पहले किए गए सर्वे के आधार पर परियोजना निर्माण की दिशा में आगे नहीं बढ़ सकी।
कश्मीर घाटी में डबलिंग का इंतजार
कश्मीर घाटी में मौजूदा रेल नेटवर्क पर बढ़ते दबाव के बीच अतिरिक्त क्षमता की जरूरत भी महसूस की जा रही है। सूत्रों ने न्यूज़ एजेंसी कश्मीर न्यूज़ ट्रस्ट को बताया कि रेल मंत्रालय ने 118 किलोमीटर लंबे काजीगुंड-श्रीनगर-बडगाम डबलिंग प्रोजेक्ट की DPR तैयार कर ली है। हालांकि, DPR तैयार होने का मतलब परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलना या निर्माण शुरू होना नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, DPR के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित स्टेकहोल्डर्स, नीति आयोग और वित्त मंत्रालय से परामर्श और आवश्यक मंजूरियां लेनी होती हैं।
इसी तरह प्रस्तावित 40 किलोमीटर लंबी बारामूला-उरी रेल लाइन भी अभी DPR स्टेज पर है। रेल मंत्रालय ने इसे सीमावर्ती क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में प्रस्तावित परियोजना बताया है। हालांकि, इसके निर्माण या कमीशनिंग को लेकर अभी कोई घोषणा नहीं हुई है।
सोपोर-कुपवाड़ा लाइन हुई बंद
कश्मीर में प्रस्तावित एक अन्य रेल परियोजना को व्यवहारिक न पाए जाने के बाद छोड़ दिया गया है। रेल मंत्रालय के अनुसार, 34 किलोमीटर लंबी सोपोर-कुपवाड़ा नई रेल लाइन के लिए सर्वे और DPR तैयार की गई थी, लेकिन बाद में परियोजना को फीजिबल नहीं पाए जाने के कारण इसे बंद कर दिया गया। वहीं, 78 किलोमीटर लंबी जम्मू-कटरा रेल लाइन को लेकर भी प्रक्रिया जारी है। DPR तैयार करने के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी मिल चुकी है और फील्ड सर्वे शुरू किया जा चुका है। यानी यह परियोजना भी फिलहाल शुरुआती तैयारी के चरण में है।
जालंधर कैंट-जम्मू तवी तीसरी लाइन भी DPR स्टेज पर
रेल मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 216 किलोमीटर लंबी जालंधर कैंट-जम्मू तवी तीसरी लाइन परियोजना भी अभी निर्माण चरण में नहीं पहुंची है और DPR स्टेज पर है। जम्मू-कश्मीर में पूरी हो चुकी रेल परियोजनाओं और निर्माण या योजना के स्तर पर मौजूद परियोजनाओं के बीच का अंतर रेलवे बजट के आंकड़ों में भी दिखाई देता है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रेल मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर के लिए औसत वार्षिक रेलवे बजट आवंटन करीब 1,086 करोड़ रुपये रखा है। 2009-14 के दौरान यह औसत आवंटन करीब 1,044 करोड़ रुपये था। मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा आवंटन ढांचे में जम्मू-कश्मीर में चल रही परियोजनाओं के लिए करीब 522 करोड़ रुपये शामिल हैं।
बजट आंकड़ों को समझना भी जरूरी
इन आंकड़ों को परियोजनावार संदर्भ में देखना जरूरी है, क्योंकि USBRL जैसे बड़े रेलवे प्रोजेक्ट्स का लेखा-जोखा परियोजना और जोनल आधार पर अलग-अलग रखा जाता है। इसलिए **1,086 करोड़ रुपये के वार्षिक आंकड़े को जम्मू-कश्मीर में एक साल के दौरान सभी रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की गई कुल राशि नहीं माना जा सकता।* रेल मंत्रालय के ताजा रिकॉर्ड जम्मू-कश्मीर में रेलवे विकास की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने रखते हैं। एक ओर **USBRL ने कश्मीर घाटी को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से एक नया और महत्वपूर्ण कनेक्शन दिया है।
वहीं दूसरी ओर पुंछ, राजौरी, कुपवाड़ा और कश्मीर घाटी के कुछ हिस्सों से जुड़े कई रणनीतिक रेल लिंक अभी सर्वे, DPR या मंजूरी के चरण में हैं। इन परियोजनाओं का जमीनी लाभ तभी सामने आएगा, जब ये प्रस्तावित योजनाएं सर्वे और DPR से आगे बढ़कर अंतिम मंजूरी, निर्माण और अंततः कमीशनिंग के चरण तक पहुंचेंगी।