शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा की याद में SGPC ने कराया समागम, हरिके में स्मारक बनाने की तैयारी
शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा की याद में SGPC ने कराया समागम, हरिके में स्मारक बनाने की तैयारी
अमृतसर: मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा की स्मृति में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से विशेष समागम आयोजित किया गया। श्री अकाल तख्त साहिब की सरपरस्ती में यह कार्यक्रम श्री दरबार साहिब परिसर स्थित गुरुद्वारा शहीद बाबा गुरबख्श सिंह जी में हुआ। कार्यक्रम में सिख संगठनों और संगत ने भी भाग लिया।
धार्मिक कार्यक्रम के साथ शहीद को किया याद
समागम की शुरुआत श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के साथ हुई। इसके बाद हजूरी रागी भाई सतनाम सिंह के जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन किया, जबकि अरदास भाई प्रेम सिंह ने की। श्री दरबार साहिब के ग्रंथी ज्ञानी राजदीप सिंह ने संगत को पावन हुकमनामा सुनाया।
कार्यक्रम में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह, SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी सहित कई प्रमुख हस्तियों ने उपस्थिति दर्ज कराई। शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा की बहन बीबी बलबीर कौर और भाई कुलदीप सिंह बचड़े की पत्नी बीबी कवलजीत कौर भी विशेष रूप से मौजूद रहीं।
‘भाई खालड़ा ने लावारिस शवों के लिए उठाई आवाज’
संगत को संबोधित करते हुए श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि 1982 से 1994 के दौर में पंजाब में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में सिख युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की मौत हुई तथा कई शवों को लावारिस बताकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि भाई जसवंत सिंह खालड़ा ने ऐसे मामलों की जानकारी जुटाने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए अथक प्रयास किए। अपने अभियान के दौरान उन्होंने बड़ी संख्या में लावारिस बताए गए शवों का विवरण एकत्र किया। इसी संघर्ष के चलते उन्हें भी अगवा कर शहीद कर दिया गया।
हरिके में बनेगी शहीदी यादगार
ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि भाई जसवंत सिंह खालड़ा ने निडर होकर मानवाधिकार और इंसाफ के लिए आवाज उठाई। उन्होंने बताया कि शहीदी पत्तन हरिके में भाई खालड़ा की स्मृति में स्मारक स्थापित करने की दिशा में जल्द काम शुरू किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि 1982 से 1994 के दौर में शहीद हुए लोगों से संबंधित विवरण एकत्र करने का कार्य भी SGPC द्वारा शुरू किया जाएगा। इस पूरे कार्य की सरपरस्ती श्री अकाल तख्त साहिब के अधीन होगी।
SGPC अध्यक्ष ने बताया ऐतिहासिक योगदान
SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भाई जसवंत सिंह खालड़ा को मानवाधिकार, सत्य और न्याय के लिए समर्पित महान व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि खालड़ा ने उन युवाओं के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ी, जिन्हें कथित तौर पर घरों से उठाकर प्रताड़ित किया गया और बाद में लावारिस बताकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में भाई खालड़ा ने अपना जीवन बलिदान कर दिया। उनके परिवार ने भी कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए उनके द्वारा शुरू किए गए संघर्ष को आगे बढ़ाया।