बच्चों का भविष्य सिर्फ शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं, सरकार-टीचर और माता-पिता मिलकर करें काम: उमर अब्दुल्ला
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि बच्चों का भविष्य बनाने की जिम्मेदारी केवल शिक्षकों के कंधों पर नहीं डाली जा सकती। इसके लिए सरकार, शिक्षक और माता-पिता को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में बच्चों को नई चुनौतियों के लिए तैयार करने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में J&K टीचर्स फोरम की ओर से आयोजित एक दिवसीय एजुकेशन कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। कॉन्फ्रेंस का विषय ‘बच्चे हमारी प्राथमिकता हैं’ था। इसमें शिक्षक, रिसर्चर, शिक्षा विशेषज्ञ और नीति बनाने से जुड़े लोग शामिल हुए।
शिक्षकों के सामने बढ़ी चुनौतियां
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पिछले 10 से 20 वर्षों में टीचिंग का काम काफी बदल गया है। आज शिक्षकों को बच्चों का ध्यान बनाए रखने के लिए स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, टीवी और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों से भी मुकाबला करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है, लेकिन उन्हें जवाब सुनने और समझने की आदत भी डालनी होगी। मुख्यमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की उस सोच का भी जिक्र किया, जिसमें बच्चों के भविष्य और बेहतर समाज बनाने में माता-पिता और शिक्षकों की अहम भूमिका बताई गई थी।
शिक्षकों पर अतिरिक्त काम का बोझ कम करने का भरोसा
मुख्यमंत्री ने माना कि सरकार भी कई बार शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा अतिरिक्त जिम्मेदारियां दे देती है। इनमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी, विभिन्न सरकारी अभियानों, नशा मुक्ति अभियान और चुनावी ड्यूटी जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों की वास्तविक और पेशेवर समस्याओं को दूर करने के लिए काम करेगी। इनमें ट्रांसफर, डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (DPC), खाली पद और अन्य विभागीय मुद्दे शामिल हैं। उमर अब्दुल्ला ने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि वह और शिक्षा मंत्री सकीना इटू मिलकर इन समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करेंगे।
दूर-दराज के स्कूलों पर विशेष ध्यान की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों और दूर-दराज के इलाकों में काम करने वाले शिक्षकों की चुनौतियां ज्यादा हैं। कई जगह स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, जबकि कुछ शहरी स्कूलों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक और कम छात्र हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की तैनाती में संतुलन बनाने, खाली पद भरने और स्कूलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सरकार की है।
उमर अब्दुल्ला ने यह भी माना कि जम्मू-कश्मीर के कुछ स्कूलों में अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। कुछ स्कूल किराए की इमारतों या असुरक्षित भवनों में चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार धीरे-धीरे स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर करने पर काम कर रही है।
AI के दौर के लिए बच्चों को तैयार करना जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर ने काफी प्रगति की है, लेकिन अब दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। आने वाले वर्षों में तकनीक और समाज में बदलाव की रफ्तार और तेज होगी। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें नई स्किल्स, आत्मविश्वास और सही मूल्यों के साथ भविष्य के लिए तैयार करना होगा, ताकि वे जम्मू-कश्मीर के विकास में सकारात्मक योगदान दे सकें।
TET के मुद्दे पर भी बोले मुख्यमंत्री
उमर अब्दुल्ला ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के मुद्दे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को कई बार संबंधित स्तर पर उठाने की कोशिश कर चुकी है और आगे भी अपनी बात रखेगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का समाधान बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि उन्हें यह नहीं सोचना चाहिए कि सरकार सारी जिम्मेदारी उन्हें सौंपकर पीछे हट जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की सफलता के लिए सरकार को भी बेहतर स्कूल, पर्याप्त स्टाफ और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार शिक्षकों की स्थिति और स्कूलों का माहौल बेहतर करती है, तो शिक्षक भी बच्चों का भविष्य बेहतर तरीके से बना सकेंगे। कॉन्फ्रेंस में शिक्षा मंत्री सकीना इटू, मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी, विभिन्न विधायक, शिक्षा विभाग के अधिकारी, J&K टीचर्स फोरम के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।