चीनी-गुड़ के बढ़े दामों से बिगड़ा घर का बजट, दूध-चायपत्ती और गैस की महंगाई ने बढ़ाई चिंता
मोगा,24 अगस्त ( दलीप कुमार) रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं के लगातार बढ़ते दामों ने आम परिवारों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। चीनी, गुड़ और शक्कर के दाम बढ़ने के साथ दूध, चायपत्ती और गैस की बढ़ती कीमतों ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि आमदनी पहले जैसी ही है, लेकिन खर्च बढ़ने के कारण अब उसी बजट में पहले की तुलना में कम सामान खरीदना पड़ रहा है। त्योहारों का सीजन नजदीक आने के साथ चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है, जिससे आम लोगों पर महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
दुकानदारों के मुताबिक चीनी, गुड़ और शक्कर के दाम बढ़ने का सीधा असर ग्राहकों की खरीदारी पर पड़ा है। पहले जो ग्राहक 4-5 किलो चीनी या अन्य सामान खरीद लेते थे, अब वे जरूरत के मुताबिक 2-3 किलो ही खरीद रहे हैं। कई परिवार पहले महीने भर का सामान एक साथ खरीदकर रखते थे, लेकिन अब खर्च कम करने के लिए कम मात्रा में सामान खरीदकर काम चला रहे हैं। दुकानदारों ने बताया कि महंगाई का असर केवल ग्राहकों पर ही नहीं, बल्कि छोटे कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। दुकान का किराया, टैक्स, अन्य खर्च और सामान की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि ग्राहकों की खरीदारी करने की क्षमता कम हो रही है। चाय, मिठाइयों और घर में रोजाना इस्तेमाल होने वाली अन्य वस्तुओं की लागत बढ़ने से लोग अपने खर्चों में कटौती करने को मजबूर हैं।एक दुकानदार ने बताया कि पहले ग्राहक जरूरत के साथ-साथ कुछ अतिरिक्त सामान भी खरीद लेते थे, लेकिन अब अधिकांश लोग केवल जरूरी सामान ही खरीद रहे हैं। उनका कहना है कि यदि रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो छोटे दुकानदारों के कारोबार पर भी इसका असर और बढ़ सकता है।
आम उपभोक्ताओं ने भी जताई चिंता
उपभोक्ताओं का कहना है कि महंगाई के कारण घर का बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है। एक उपभोक्ता ने बताया कि पहले वह घर के लिए करीब 15 किलो चीनी खरीदता था, लेकिन कीमत बढ़ने के बाद अब 10 किलो से ही गुजारा करना पड़ रहा है। कई बार जरूरत 10 किलो की होने के बावजूद खर्च कम करने के लिए 6-7 किलो ही खरीदनी पड़ती है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि यह समस्या केवल चीनी तक सीमित नहीं है। रोजाना इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुओं के दाम बढ़ने के कारण हर परिवार को अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। पहले घर आने वाले रिश्तेदारों और दोस्तों को चाय-पानी करवाना सामान्य बात थी, लेकिन बढ़ते खर्चों के कारण अब छोटी-छोटी जरूरतों पर भी कई बार सोचना पड़ता है।लोगों का कहना है कि बाजार में थोड़ी-सी खरीदारी करने पर ही बड़ी रकम खर्च हो जाती है। ऐसे में जेब में पैसा होने के बावजूद खर्च करने से पहले कई बार सोचना पड़ता है। बढ़ती कीमतों ने लोगों की खरीदारी क्षमता को प्रभावित किया है और इसका असर बाजार के कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है।
दुकानदारों और उपभोक्ताओं ने सरकार से मांग की है कि रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि आम परिवारों को बढ़ती महंगाई से राहत मिल सके।