पंजाब में मधुमक्खियों के लिए नया खतरा, PAU के वैज्ञानिकों ने शहद के फार्मों में पाया स्मॉल हाइव बीटल का हमला
पंजाब में मधुमक्खियों के लिए नया खतरा, PAU के वैज्ञानिकों ने शहद के फार्मों में पाया स्मॉल हाइव बीटल का हमला
लुधियाना: पंजाब में शहद उत्पादन से जुड़े किसानों और मधुमक्खी पालकों के लिए एक नई चिंता सामने आई है। लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के वैज्ञानिकों द्वारा की जा रही जांच के दौरान शहद मधुमक्खी फार्मों में स्मॉल हाइव बीटल का हमला पाया गया है। यह कीट पंजाब में शहद मधुमक्खियों के लिए एक नया खतरा माना जा रहा है।
भूरे या काले रंग का होता है बीटल
स्मॉल हाइव बीटल भूरे या काले रंग का कीट होता है। इसके पंख पेट को पूरी तरह नहीं ढकते। मादा बीटल सफेद रंग के छोटे और लंबे अंडे समूहों में देती है। अंडों से निकलने वाली सुंडियां पूरी तरह विकसित होने के बाद जमीन में प्यूपा बनाती हैं, जिनसे वयस्क बीटल निकलते हैं।
ब्रूड, शहद और छत्तों को पहुंचाता है नुकसान
इस कीट की सुंडियां और वयस्क बीटल दोनों मधुमक्खियों के ब्रूड, शहद, पराग और छत्तों को नुकसान पहुंचाते हैं। बीटल द्वारा शहद में मल त्याग करने के कारण शहद खराब हो सकता है।
बीटल और उसकी सुंडियां अक्सर हाइव के अंधेरे कोनों, दरारों और कोशिकाओं में छिपी रहती हैं, जिससे इनकी पहचान और रोकथाम चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
मधुमक्खी परिवारों का लगातार निरीक्षण जरूरी
विशेषज्ञों ने मधुमक्खी पालकों को सलाह दी है कि वे अपने मधुमक्खी परिवारों और छत्तों का नियमित निरीक्षण करते रहें। बीटल की मौजूदगी पाए जाने पर छत्तों को 4 से 6 मिलीमीटर जाली वाली खाली हाइव में झाड़कर बीटल को मधुमक्खियों से अलग किया जा सकता है।
इकट्ठे किए गए बीटल को आग की लौ से या साबुन वाले पानी में डुबोकर नष्ट करने की सलाह दी गई है।
बीटल को फार्म से दूर न झाड़ें
विशेषज्ञों ने खास तौर पर चेतावनी दी है कि बीटल को मधुमक्खी फार्म से दूर झाड़कर छोड़ना नहीं चाहिए। ये कीट कई किलोमीटर तक उड़ सकते हैं और दूसरे मधुमक्खी फार्मों तक पहुंचकर वहां भी नुकसान कर सकते हैं।
ट्रैप लगाकर भी किया जा सकता है नियंत्रण
स्मॉल हाइव बीटल को नियंत्रित करने के लिए हाइव के अंदर बीटल ट्रैप भी लगाए जा सकते हैं। इसके लिए ट्रैप में 25-30 मिलीलीटर खाने वाला तेल और 5 मिलीलीटर सेब का सिरका डालने की सलाह दी गई है।
बीटल के हमले की गंभीरता के अनुसार प्रत्येक मधुमक्खी परिवार में 2 से 4 ट्रैप छत्तों के बीच लटकाए जा सकते हैं। विशेषज्ञों ने मधुमक्खी पालकों से समय रहते निगरानी और रोकथाम के उपाय अपनाने की अपील की है।