बेमौसमी फूलगोभी-बंदगोभी ने खोले कमाई के नए द्वार, कुल्लू के किसान हुए खुशहाल
बेमौसमी फूलगोभी-बंदगोभी ने खोले कमाई के नए द्वार, कुल्लू के किसान हुए खुशहाल
हिमाचल प्रदेश: कुल्लू जिले में किसान पारंपरिक फल उत्पादन के साथ अब बेमौसमी सब्जियों की खेती को भी तेजी से अपना रहे हैं। फूलगोभी और बंदगोभी की बेमौसमी फसल किसानों के लिए बेहतर आय का साधन बन रही है। कुल्लू, नग्गर, भुंतर और बंजार विकास खंडों में सैकड़ों किसान वैज्ञानिक तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन के जरिए व्यावसायिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं।
मैदानी क्षेत्रों में आवक कम होने पर मिलता है बेहतर भाव
कुल्लू की बेमौसमी सब्जियां ऐसे समय बाजार में पहुंचती हैं, जब मैदानी क्षेत्रों से इनकी आवक कम या समाप्त हो जाती है। इसके चलते फूलगोभी और बंदगोभी को बाजार में बेहतर दाम मिल रहे हैं। किसानों को उनकी मेहनत का उचित आर्थिक लाभ मिलने से उनका रुझान नकदी फसलों की ओर बढ़ रहा है।
किसानों को बीज और सिंचाई पर मिल रहा अनुदान
राज्य सरकार किसानों को उन्नत बीज, खाद और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने के साथ विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता भी दे रही है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत गोभी के बीज की खरीद पर किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। वहीं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई व्यवस्था के लिए 55 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध है। पिछले वर्ष इस योजना के तहत जिले के 91 किसानों को लाभ मिला।
स्थानीय मंडियों ने आसान की उपज की बिक्री
किसानों को स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध करवाना भी सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। पतलीकूहल, भुंतर, बंदरोल और बंजार सहित विभिन्न स्थानों पर सब्जी मंडियां उपलब्ध होने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर के बाजारों में नहीं जाना पड़ता। उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से व्यापारी इन मंडियों में पहुंचकर कुल्लू की सब्जियों की खरीद करते हैं।
किसानों को परिवहन लागत में भी बचत
परवी गांव के किसान शेर सिंह बेमौसमी फूलगोभी का उत्पादन कर रहे हैं और अपनी उपज बंदरोल मंडी में बेचते हैं। उनका कहना है कि मंडी में फसल के अच्छे दाम मिल रहे हैं। स्थानीय बाजार की सुविधा से उन्हें लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती, जिससे समय और परिवहन लागत दोनों की बचत होती है।
सोयल के मोहन लाल और मलाह के छापे राम सहित जिले के सैकड़ों किसान भी नकदी फसलों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं। वैज्ञानिक सलाह, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाओं और बाजार की उपलब्धता ने किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर व्यावसायिक कृषि अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
550 हेक्टेयर में हो रही गोभी की खेती
कुल्लू जिले में वर्तमान में करीब 550 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलगोभी और बंदगोभी की खेती हो रही है। इनमें लगभग 350 हेक्टेयर में फूलगोभी और 200 हेक्टेयर में बंदगोभी की खेती की जा रही है। इन फसलों से करीब 1,100 मीट्रिक टन उत्पादन प्राप्त होता है। कुल्लू में उत्पादित सब्जियां हिमाचल प्रदेश के अलावा उत्तर भारत के कई राज्यों के बाजारों तक पहुंचती हैं।
वैज्ञानिक सलाह से बढ़ रही गुणवत्ता और उत्पादकता
किसानों को कृषि विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों से फसल चयन, बीज उपचार, रोग एवं कीट नियंत्रण, सिंचाई और आधुनिक उत्पादन तकनीक से जुड़ी जानकारी मिल रही है। वैज्ञानिक सलाह के कारण फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार हो रहा है, जिससे किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिल रही है।
कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। सरकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों को उत्पादन, सिंचाई, मशीनीकरण, बाड़ संरक्षण, उन्नत बीज और विपणन सहित विभिन्न स्तरों पर सहयोग उपलब्ध करवाया जा रहा है।
सरकारी सहायता, वैज्ञानिक कृषि परामर्श, आधुनिक तकनीक और स्थानीय बाजार की सुविधा मिलकर खेती को किसानों के लिए लाभकारी और सम्मानजनक व्यवसाय बना रही है। बेमौसमी सब्जियों की खेती के जरिए कुल्लू के सैकड़ों किसान अपनी आजीविका मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण में भी योगदान दे रहे हैं।