नशा-मुक्त भारत से रैगिंग-मुक्त परिसर तक, हिंदी विभाग ने लिया जागरूकता और जिम्मेदारी का संकल्प
शिमला: प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के हिंदी विभाग द्वारा आज प्रातः 10 बजे विभागीय कक्ष में ‘नशा-मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत ‘नशे के विरुद्ध राष्ट्रीय शपथ’ एवं एंटी-रैगिंग जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. भवानी सिंह, डॉ. नरेश कुमार, डॉ. शोभा रानी, डॉ. सुनीता ठाकुर सहित विभाग के शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ विश्वविद्यालय परिसर को रैगिंग जैसी कुप्रथा से मुक्त रखते हुए स्वस्थ, सुरक्षित, अनुशासित एवं सौहार्दपूर्ण शैक्षणिक वातावरण के निर्माण के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम के आरंभ में विभागाध्यक्ष डॉ. भवानी सिंह ने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को नशे के विरुद्ध राष्ट्रीय शपथ दिलाई। सभी प्रतिभागियों ने स्वयं को प्रत्येक प्रकार के नशे से दूर रखने तथा अपने परिवार, मित्रों और समाज को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। प्रतिभागियों ने नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता फैलाने तथा अपने जिले, राज्य और राष्ट्र को नशा-मुक्त बनाने में अपनी क्षमता के अनुसार हरसंभव योगदान देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में डॉ. नरेश कुमार ने नशे एवं रैगिंग को गंभीर सामाजिक और शैक्षणिक चुनौतियाँ बताते हुए कहा कि युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि युवा जीवन-ऊर्जा, संभावनाओं और सृजनात्मक शक्ति के प्रतीक हैं; इसलिए इस ऊर्जा को नशे जैसी विनाशकारी प्रवृत्तियों से बचाकर शिक्षा, सृजन, अनुसंधान और राष्ट्र-निर्माण की दिशा में लगाना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं नशे से दूर रहने तथा अपने परिवार, मित्रों और समाज के अन्य लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
द्वितीय सत्र में डॉ. शोभा रानी ने नशे की प्रवृत्ति के गंभीर प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नशे की शुरुआत कई बार सामान्य आकर्षण, जिज्ञासा या शौक के रूप में होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यक्ति के स्वास्थ्य, व्यक्तित्व, परिवार और भविष्य को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति राष्ट्र की सबसे बड़ी पूँजी और ऊर्जा है तथा उसे नशे से सुरक्षित रखना केवल व्यक्ति का नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की सामूहिक जिम्मेदारी है।
इसी क्रम में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने रैगिंग के पूर्ण बहिष्कार तथा रैगिंग-मुक्त विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे न तो रैगिंग करेंगे, न उसे प्रोत्साहित करेंगे और न ही किसी ऐसी गतिविधि का समर्थन करेंगे, जो किसी विद्यार्थी के सम्मान, गरिमा अथवा मानसिक सुरक्षा को प्रभावित करे। शपथ ग्रहण के पश्चात विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने नशा-मुक्त भारत अभियान की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन ई-शपथ (e-Pledge) भी ग्रहण की।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. सुनीता ठाकुर ने सभी प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नशा-मुक्त और रैगिंग-मुक्त परिसर केवल एक प्रशासनिक लक्ष्य नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक चेतना, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञानार्जन का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और जीवन-मूल्यों के विकास का भी महत्वपूर्ण परिसर है। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी का यह दायित्व है कि वह स्वयं सकारात्मक परिवर्तन का वाहक बने और अपने आचरण से दूसरों को प्रेरित करे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवाओं की जागरूकता, संकल्प और सक्रिय सहभागिता से विश्वविद्यालय परिसर को और अधिक सुरक्षित, स्वस्थ, संस्कारित एवं प्रेरणादायी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम का मंच संचालन शोधार्थी आरुषि ने प्रभावी एवं सुव्यवस्थित ढंग से किया।